UP Board Class 12 Previous Year Question Paper
UP Board Class 12 Samanya Hindi First Paper Question Paper 2014 – Free PDF Download-सामान्य हिन्दी-प्रथम प्रश्नपत्र
UP Board CLASS 12 PREVIOUS YEAR QUESTION PAPER
HINDI Question Paper I, सामान्य हिन्दी-प्रथम प्रश्नपत्र 2014
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इण्टरमीडिएट परीक्षा, 2014
सामान्य हिन्दी-प्रथम प्रश्नपत्र
समय : 3 घण्टे 15 मिनट | 304 (CB) | पूर्णांक : 50
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HINDI Question Paper I, सामान्य हिन्दी-प्रथम प्रश्नपत्र 2014
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क) असत्य कथन है- (i) डॉ० हजारी प्रसाद द्विवेदी निबन्धकार एवं उपन्यासकार हैं। (ii) महावीरप्रसाद द्विवेदी 'सरस्वती' पत्रिका के सम्पादक थे। (iii) रामचन्द्र शुक्ल 'हिन्दी साहित्य का इतिहास' ग्रन्थ के लेखक हैं। (iv) प्रतापनारायण मिश्र 'हिन्दी प्रदीप' के सम्पादक थे।
(ख) गद्य विधा की दृष्टि से 'आत्मकथा' है- (i) आवारा मसीहा (ii) कलम का सिपाही (iii) नीड़ का निर्माण फिर (iv) शिखर से सागर तक।
(ग) 'नासिकेतोपाख्यान' के रचनाकार हैं- (i) सदल मिश्र (ii) लल्लू लाल (iii) मुंशी सदासुखलाल (iv) राजा लक्ष्मण सिंह।
(घ) हिन्दी का प्रथम नाटक है- (i) 'भारत दुर्दशा' (ii) 'नहुष' (iii) 'न आनेवाला कल' (iv) 'चन्द्रगुप्त'
(ङ) राहुल सांकृत्यायन का वास्तविक नाम है- (i) सुदामाप्रसाद पाण्डेय (ii) वासुदेव सिंह (iii) वैद्यनाथ मिश्र (iv) केदारनाथ पाण्डेय।
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(क) 'जयमयंक जस चन्द्रिका' के रचयिता हैं- (i) भट्ट केदार (ii) नरपति नाल्ह (iii) मधुकर कवि (iv) विद्यापति।
(ख) 'रीतिमुक्त काव्यधारा' के कवि हैं- (i) घनानन्द (ii) भूषण (iii) केशवदास (iv) पद्माकर।
(ग) 'तीसरा सप्तक' का प्रकाशन-वर्ष है- (i) सन् 1951 (ii) सन् 1959 (iii) सन् 1955 (iv) सन् 1957
(घ) 'बसुआ गोविन्दपुर' में जन्म हुआ था- (i) 'रत्नाकर' का (ii) सूरदास का (iii) रामधारी सिंह 'दिनकर' का (iv) बिहारी का।
(ङ) 'कामायनी' महाकाव्य में कुल सर्ग हैं- (i) 12 (ii) 15 (iii) 17 (iv) 18.
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(क) निम्नलिखित अवतरणों में से किसी एक की सन्दर्भ सहित व्याख्या कीजिए- (i) सूर्यदेव की उदारता और न्यायप्रियता तारीफ के लायक है। तरफदारी तो उसे छू-तक नहीं गयी-पक्षपात की तो गन्ध तक उसमें नहीं, देखिए न, उदय तो उसका उदयांचल पर हुआ, पर क्षण ही भर में उसने अपने नये किरण-कलाप को उसी पर्वत के शिखर पर नहीं, प्रत्युत सभी पर्वत शिखरों पर फैलाकर उन सब की शोभा बढ़ा दी। उसकी इस उदारता के कारण इस समय ऐसा मालूम हो रहा है, जैसे सभी भूधरों ने अपने शिखरों - अपने मस्तकों पर दुपहरिया के लाल-लाल फूलों के मुकुट धारण कर लिए हों। सच है, उदारशील सज्जन अपने चारुचरितों से अपने ही उदय-देश को नहीं, अन्य देशों को भी आप्यायित करते हैं। (ii) अशोक का वृक्ष जितना भी मनोहर हो, जितना भी रहस्यमय हो, जितना भी अलंकारमय हो, परन्तु है वह उस विशाल सामन्त सभ्यता की परिष्कृत रुचि का ही प्रतीक, जो साधारण प्रजा के परिश्रमों पर पली थी, उसके रक्त के संसार-कणों को खाकर बड़ी हुई थी और लाखों-करोड़ों की उपेक्षा से जो समृद्ध हुई थी। वे सामन्त उखड़ गए, समाज ढह गए और मदनोत्सव की धूमधाम भी मिट गयी। सन्तान-कामिनियों को गन्धों से अधिक शक्तिशाली देवताओं का वरदान मिलने लगा। पीरों ने, भूत-भैरवों ने, काली दुर्गा ने यक्षों की इज्जत घटा दी। दुनिया अपने रास्ते चली गई, अशोक पीछे छूट गया।
(ख) निम्नलिखित में से किसी एक सूक्ति की सन्दर्भ सहित व्याख्या कीजिए- (i) 'भूल करना बुरा नहीं है, भूल को भूल न समझना ही बड़ा दुर्भाग्य है।' (ii) 'अपने देश में अपनी भाषा में उन्नति करो।' (iii) 'निन्दकों की-सी एकाग्रता, परस्पर आत्मीयता, निमग्नता भक्तों में दुर्लभ है।'
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(क) निम्नलिखित अवतरणों में से किसी एक की सन्दर्भ सहित व्याख्या कीजिए- (i) ऐसी मूढ़ता या मन की। परिहारि रामभगति-सुरसरिता आस करत ओसकन की।। धूमसमूह निरखि चातक ज्यों तृषित जानि मति घन की। नहिं तहँ सीतलता न वारि, पुनि हानि होति लोचन की।। ज्यों गच-काँच विलोकि सेन जड़ छाँह आपने तन की। टूटत अति आतुर अहार बस छति बिसारि आनन की।। कहँ लौं कहौं कुचाल कृपानिधि जानत हौ गति मन की। तुलसीदास प्रभु हरहु दुसह दुख, करहु लाज निज पन की।। (ii) प्रेम-मद-छाके पग परत कहाँ के कहाँ थाके अंग नैननि सिथिलता सुहाई है। कहें 'रत्नाकर' यों आवत चकात ऊधौ मानौ सुधियात कोऊ भावना भुलाई है।। धारत धरा पै ना उदार अति आदर सौं सारत बँहोलिनि जो आँसु अधिकाई है। एक कर राजै नवनीत जसुदा कौ दियौ एक कर बंसी बर राधिका-पठाई है।।
(ख) निम्नलिखित सूक्तियों में से किसी एक की ससन्दर्भ व्याख्या कीजिए- (i) 'पाका कलस कुम्हार का बहुरि न चढ़ई चाकि।' (ii) 'नाक बस बेसरि लह्यो बसि मुकतन के संग।' (iii) 'दुःख की पिछली रजनी बीच, विकसता सुख का नवल प्रभात।'
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निम्नलिखित में से किसी एक लेखक का साहित्यिक परिचय देते हुए उनकी कृतियों पर प्रकाश डालिए : (i) सरदार पूर्ण सिंह (ii) राहुल सांकृत्यायन (iii) रामवृक्ष बेनीपुरी।
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निम्नलिखित में से किसी एक कवि का साहित्यिक परिचय एवं उनकी कृतियों का उल्लेख कीजिए : (i) सूरदास (ii) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र (iii) सुमित्रानन्दन पन्त।
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(क) 'आकाशदीप' अथवा 'बहादुर' कहानी का सारांश अपने शब्दों में लिखिए। अथवा 'प्रायश्चित' अथवा 'लाटी' कहानी के उद्देश्य पर प्रकाश डालिए।
(ख) स्वपठित नाटक के आधार पर निम्नलिखित प्रश्नों में से किसी एक का उत्तर दीजिए : (i) 'राजमुकुट' नाटक के आधार पर मुगल सम्राट अकबर का चरित्रांकन कीजिए। अथवा 'राजमुकुट' नाटक की कथावस्तु संक्षेप में लिखिए। (ii) 'कुहासा और किरण' नाटक के आधार पर 'अमूल्य' का चरित्र-चित्रण कीजिए। अथवा 'कुहासा और किरण' नाटक के कथानक पर प्रकाश डालिए। (iii) 'सूतपुत्र' नाटक के आधार पर 'अर्जुन' की चारित्रिक विशेषताएँ निरूपित कीजिए। अथवा 'सूतपुत्र' नाटक के चतुर्थ अंक की कथा अपने शब्दों में लिखिए। (iv) 'आन का मान' नाटक के आधार पर 'दुर्गादास' का चरित्र-चित्रण कीजिए। अथवा 'आन का मान' नाटक के पहले अंक की कथावस्तु पर प्रकाश डालिए। (v) 'गरुड़ध्वज' नाटक के आधार पर 'विक्रममित्र' का चरित्रांकन कीजिए। अथवा 'गरुड़ध्वज' नाटक के तीसरे अंक की कथा अपने शब्दों में लिखिए।
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स्वपठित खण्डकाव्य के आधार पर किसी एक खण्डकाव्य के एक प्रश्न का उत्तर दीजिए : (i) 'रश्मिरथी' खण्डकाव्य के आधार पर उसके नायक का चरित्र-चित्रण कीजिए। अथवा 'रश्मिरथी' खण्डकाव्य के 'सप्तम सर्ग' की कथावस्तु पर प्रकाश डालिए। (ii) 'मुक्ति यज्ञ' खण्डकाव्य के आधार पर महात्मा गाँधी की चारित्रिक विशेषताएँ उद्घाटित कीजिए। अथवा 'मुक्ति यज्ञ' खण्डकाव्य की कथावस्तु पर संक्षेप में प्रकाश डालिए। (iii) 'सत्य की जीत' खण्डकाव्य के आधार पर 'द्रौपदी' का चरित्रांकन कीजिए। अथवा 'सत्य की जीत' खण्डकाव्य की कथा संक्षेप में लिखिए। (iv) 'त्यागपथी' खण्डकाव्य के आधार पर 'हर्षवर्धन' की चारित्रिक विशेषताएँ निरूपित कीजिए। अथवा 'त्यागपथी' खण्डकाव्य के 'तृतीय सर्ग' की कथा अपने शब्दों में लिखिए। (v) 'आलोकवृत्त' खण्डकाव्य के प्रमुख पात्र की चरित्रगत विशेषताओं पर प्रकाश डालिए। अथवा 'आलोकवृत्त' खण्डकाव्य के 'चतुर्थ सर्ग' की कथावस्तु पर प्रकाश डालिए। (vi) 'श्रवण कुमार' खण्डकाव्य के आधार पर श्रवण कुमार का चरित्र-चित्रण कीजिए। अथवा 'श्रवण कुमार' खण्डकाव्य की कथावस्तु संक्षेप में लिखिए।
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